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Hydroponic Farming in Hindi. कैसे होती है हाइड्रोपोनिक खेती?

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और हर साल कृषि के क्षेत्र में उपज और उपज बढ़ाने के लिए नए प्रकार के अनाज और उपकरणों का आविष्कार किया जा रहा है। इन नई तकनीकों को इस्तेमाल करके आज बहुत तेजी से कृषि के क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं।आज हम आपको एक ऐसे ही तकनीक के विषय में जानकारी देने जा रहे हैं जिस पर वर्तमान समय के कृषिक अपनी रुझान को और भी अधिक कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं खेती में प्रयोग किए जाने वाले Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) प्रणाली की।यह प्रणाली खेती करने वाले किसानों हेतु एक मुनाफे की प्रणाली सिद्ध हो रही है।Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) प्रणाली को अपनाकर किसान अपने पारंपरिक खेती को छोड़कर इस प्रणाली के माध्यम से अधिक से अधिक आजीविका का उपार्जन कर सकता है।

आइए जानते हैं कि खेती के क्षेत्र में आई नई प्रणाली Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) क्या है और यह किस प्रकार से किसानों के लिए एक बेहतर प्रणाली सिद्ध हो रही है।

Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) प्रणाली

आज से कई दशकों पहले किसी भी किसान ने यह नहीं सोचा होगा कि बिना जमीन के भी किसानी की जा सकती है और किसान अपनी आजीविका को और भी बेहतर बिना जमीन के भी कर सकता है। किंतु आज हमें खेती के एक ऐसे प्रणाली के बारे में ज्ञात हैं जिसमें आप बिना अधिक जमीन के भी बेहतर कृषि कर सकते हैं। Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) तकनीक के आ जाने से इस नामुमकिन कार्य को भी करके दिखाया गया है।अब किसान बिना अधिक मिट्टी का इस्तेमाल किए एक अच्छी फसल पैदा कर सकता है। अगर आप अभी तक इस तकनीकी के बारे में अधिक जानकारी नहीं प्राप्त कर पाए हैं तो यह लेख आपके लिए एक बेहतर लेख सिद्ध होगा।

आइए जानते हैं कि एक किसान Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) तकनीकी का उपयोग करके कैसे अपनी कृषि क्षेत्र को और बढ़ावा दे सकता है।

Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) क्या है?

कृषि के क्षेत्र में एक आधुनिक तरीका जिससे किसान बिना अधिक लागत के अच्छी उपज वाले फसल उगा सकते हैं। Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) एक ऐसा कृषि करने का तरीका है जिसमें बिना मिट्टी के प्रयोग किए बिना ही खेती की जा सकती है। Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती करने के लिए किसानों को केवल पानी या फिर पानी के साथ बालू और कंकड़ की आवश्यकता होती है। इसमें वातावरण के जलवायु नियंत्रण की कोई भी आवश्यकता नहीं होती। इस खेती को सामान्यतः 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 80 से 50% आद्रता में आसानी से की जा सकती है। इस कम लागत और अधिक उपज वाली तकनीकी में उत्पन्न होने वाले पौधों को पोषक पदार्थ कैसे प्राप्त होते हैं इसके विषय में आप नीचे के लेख को पूरा पढ़ें।

Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती के पौधे को पोषक तत्व:-

मैदानों पर खेती करने के लिए तथा पौधों को बढ़ने के लिए पौधों को पोषक तत्वों की अति आवश्यकता होते हैं। पौधों को मैदान में ऊपर जाने पर उसे स्वता ही मृदा में उपस्थित पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं और अगर यदि आप Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) विधि से खेती कर रहे हैं तो इन पौधों को कैसे पोषक तत्व प्राप्त होंगे इस विषय में आप अवश्य सोच रहे होंगे।इस दुविधा के लिए हम आपको हम बता रहे हैं।

Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) विधि से पौधों को दिए जाने वाले पोषक तत्व जैसे फास्फोरस, नाइट्रोजन, पोटाश, सल्फर, जिंक, कैल्शियम और आयरन जैसे अनेकों पोषक तत्व और खनिज पदार्थ को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर घोल के रूप में समय-समय पर देते रहते हैं।इस प्रकार से पौधों को आवश्यक सभी पोषक तत्व तथा खनिज पदार्थ आसानी से प्राप्त हो जाते हैं और पौधों में विधि आसानी से होती है।

Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती करने का तरीका क्या है?

अगर आपने अभी तक सामान्य रूप से की जाने वाली खेती की है और Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती की शुरुआत करना चाहते हैं तो आपको Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती करने का तरीका अवश्य पता होना चाहिए। नीचे हम आपको Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती करने के लिए प्रयोग की जाने वाली विधि के विषय में जानकारी दे रहे हैं।

  • Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए आपको अनेकों पाइप की आवश्यकता होगी।
  • इन सभी पाइपों में कई छेद होते हैं और इन्हीं क्षेत्रों में पौधों को लगाया जाता है।
  • पौधों को लगाते समय ध्यान रखें कि पौधों की जड़ें पाइप के अंदर होनी चाहिए जहां पर पोषक से भरे जल उपस्थित होते हैं।
  • पोषक तत्वों से युक्त पानी में जड़े डूबी होने चाहिए। इस सामान्य से तरीके को अपनाकर आप सरलता से छोटी सी भी जमीन पर अनेकों फसल को उगा सकते हैं।
  • वर्तमान समय में Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) तकनीकी का उपयोग करके किसान अनानास, शिमला मिर्च, अजवाइन, शलजम, ककड़ी, मूली, गाजर, मिर्ची, ब्लैकबेरी, स्ट्रॉबेरी, तुलसी और आलू जैसे सामान्य फसलों को उगा सकते हैं।
  • Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती)के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप नीचे दिए गए चित्र को देखें। जिसके द्वारा आप आसानी से Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) के सिस्टम को आसानी से समझ सकते हैं।

Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती शुरू करने में लगने वाले लागत:-

इस बेहद नई तकनीकी का इस्तेमाल करने के लिए किसानों को अधिक लागत नहीं लगानी होती हैं। जब आप पहली बार इस तकनीकी का उपयोग करते हैं तो संभवत अधिक खर्च हो सकते हैं किंतु एक बार इस प्रणाली को स्थगित कर लेने के बाद खर्च की लागत से कम हो जाती है।इतने समय में आपके द्वारा उगाई जाने वाली फसलों से आप अधिक धन अर्जित कर सकते हैं।

बेहद कम जगह में उगाई जाने वाली इस तकनीक की फसलो में कम खर्च और कम पानी का उपयोग करते हुए अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। शुरुआती समय में Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) पद्धति का संयंत्र में लगभग 5000000 रुपए खर्च होते हैं। इतने खर्च में आप तकरीबन 1 एकड़ क्षेत्र में अपने किसानी को शुरू कर सकते हैं। यदि आप इस तकनीकी को एक छोटी जगह में स्थापित करना चाहते हैं तो किसान को सॉन्ग वर्ग फुट के लिए लगभग 50000 से 60000 तक की लागत में इस तकनीकी को अपना सकते हैं।

100 वर्ग फुट के क्षेत्र में किसान लगभग 200 से अधिक पौधों को उगा सकते हैं। यदि आप चाहे तो Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) पद्धति का उपयोग करके आप सब्जियों एवं फलों का उत्पादन अपने घर के छत पर भी शुरू कर सकते हैं।

Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती से प्राप्त होने वाले लाभ:-

  • इस आधुनिक पद्धति अर्थात हाइड्रोपोनिक खेती खेती का उपयोग करके किसान अधिक से अधिक पानी के खर्च को बचा सकते हैं।
  • सामान्य रूप से की जाने वाली खेती में प्रयोग किए जाने वाले से तुलना करने पर Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती में आप लगभग 90% तक जल बचा सकते हैं।
  • पारंपरिक रूप से की जाने वाली खेती की तुलना में हाइड्रोपोनिक खेती तकनीकी से की जाने वाली खेती में जगह का इस्तेमाल कम होता है और कम जगह में अधिक पौधे उगाए जा सकते हैं।
  • Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) पद्धति के द्वारा किसान पोषक तत्व के बिना किसी हानि से सरलता पूर्वक पौधों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • इस विधि से प्राप्त होने वाली फसलों की गुणवत्ता भी बेहद अधिक होती है।
  • Hydroponic Farming (Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती) तकनीकी से उगाए जाने वाले पौधे जानवरों या मौसम या किसी भी तरह के जैविक व अजैविक कारकों से प्रभावित नहीं होते हैं।

आज हमने आपको पारंपरिक खेती के समकक्ष एक बेहतर पद्धति के द्वारा की जाने वाली खेती Hydroponic Farming (हाइड्रोपोनिक खेती) खेती के विषय में जानकारी दी।इस पद्धति का उपयोग करके सामान्य किसान अब कम जमीन में अधिक पैदावार उत्पन्न कर सकता है और फसलों की गुणवत्ता में बिना किसी प्रकार की कमी करते हुए बेहतरीन आमदनी कमा सकता है।

अगर आप इस पद्धति के द्वारा अपने किसानी को और बेहतर करना चाहते हैं अब तो एक बार इस पद्धति को अवश्य अपनाएं। सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं की तैयारी करने तथा उनसे संबंधित विभिन्न प्रकार की जानकारियों को प्राप्त करने के लिए आप हमारे साथ बने रहें और अपनी तैयारी को हमारे साथ जुड़कर और बेहतर करते रहे।

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