International Relation Notes By ध्येय आईएस Download For UPSC

Hello Friends, आज हम यानि Wifigyan.com आप सभी लोगो के लिए International Relation Notes By ध्येय आईएस For UPSC लेकर आये है जो की UPSC की तैयारी करने वाले छात्रो के लिए बहुत जरुरी है| जो छात्र International Relation Notes पीडीऍफ़ को Download करना चाहता है वो निचे दिए गए Download बटन पर क्लिक करके आसानी से प्राप्त कर सकता है|

International Relation Notes By ध्येय आईएस
International Relation Notes By ध्येय आईएस

International Relation Notes By ध्येय आईएस For UPSC:-

अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) विभिन्न देशों के बीच संबंधों का अध्ययन है, साथ ही साथ सम्प्रभु राज्यों, अंतर-सरकारी संगठनों (IGOs), अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों (INGOs), गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की भूमिका का भी अध्ययन है। अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध को कभी-कभी ‘अन्तरराष्ट्रीय अध्ययन’ (इंटरनेशनल स्टडीज (IS)) के रूप में भी जाना जाता है|

What is IR (क्या है अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध):-

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विकास का इतिहास ज्यादा प्राचीन नहीं है, बल्कि यह विषय बीसवीं शताब्दी की उपज है। स्पष्ट रूप से देखा जाए तो वेल्ज विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय वुडरो विल्सन पीठ की 1919 में स्थापना से ही इसका इतिहास प्रारम्भ होता है। इस पीठ पर प्रथम आसीन होने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर ऐल्फर्ड जिमर्न थे तथा बाद में अन्य प्रमुख विद्धान जिन्होंने इस पीठ को सुशोभित किया उनमें से प्रमुख थे – सी.के. वेबस्टर, ई.एच.कार, पी.ए. रेनाल्ड, लारेंस डब्लू, माटिन, टी.ई. ईवानज आदि। इसी समय अन्य विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में भी इसी प्रकार की व्यवस्थाएं देखने को मिली। अतः पिछली एक शताब्दी के इस विषय के इतिहास पर दृष्टिपात करें तो इस विषय में आये उतार-चढ़ाव के साथ-साथ इसके एक स्वायत्त विषय में स्थापित होने के बारे में जानकारी मिलती है। इस विषय में आये बहुआयामी परिवर्तनों ने जहां एक ओर विषयवस्तु का संवर्धन, समन्वय तथा विकास किया है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न सिद्धान्तों का प्रतिपादन करके बहुत सी जटिल समस्याओं एवं पहलुओं को समझने में सहायता प्रदान की है।

केनेथ थाम्पसन ने सन् 1962 के ‘रिव्यू ऑफ पॉलिटिक्स’ में प्रकाशित अपने लेख में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इतिहास को चार भागों में बांटा है, जिसके आधार पर इस विषय का सुस्पष्ट एवं सुनिश्चित अध्ययन सम्भव हो सकता है। विकास के इन चार चरणों में शीतयुद्धोत्तर युग के पांचवें चरण को भी सम्मिलित किया जा सकता है। इनका विस्तृत वर्णन निम्न प्रकार से है-

  • (१) कूटनीतिक इतिहास का प्रभुत्व, (प्रारम्भ से 1919 तक)
  • (२) सामयिक घटनाओं/समस्याओं का अध्ययन, (1919 – 1939)
  • (३) राजनीतिक सुधारवाद का युग, (1939 – 1945)
  • (४) सैद्धान्तिकरण के प्रति आग्रह, (1945 – 1991)
  • (५) वैश्वीकरण व गैर-सैद्धान्तीकरण का युग, (1991 – 2003)

अधिक जानकारी के लिए आप लोग पीडीऍफ़ को डाउनलोड करके पढ़ सकते है जो की निचे दिया गया है|

Some Important Details About Pdf:-
  • Book Name:- International Relation Notes By ध्येय आईएस For UPSC
  • Size:-9 MB
  • Pages:- 267
  • Quality:- Good
  • Format:- PDF
  • Medium:- Hindi
  • Credit:- विनय सर 

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