Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examination

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 Hello friends, आज Wifigyan.com आप सभी के लिए Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examination लेकर आये है| जो कि भौतिक विज्ञान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है| यह टॉपिक Motion (गति) SSC, BANK, Railway और अन्य परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है| Physics Motion Notes को हम पूरे विस्तार से लेकर आये है| जिसमे आपको गति से सम्बंधित सारे प्रश्नों का उत्तर बहुत ही आसानी से मिल जायेगा| इस टॉपिक में आपको गति से सम्बंधित जैसे कि- गति क्या है?, दूरी, विस्थापन, चाल, वेग, त्वरण, न्यूटन का गति-नियम आदि बातो की जानकारी मिलेगी| जैसा कि आप लोग जानते है कि, किसी भी टॉपिक का विस्तार से जानने से पहले उसकी परिभाषा और सामान्य शब्दों में जानना भी जरुरी है|

Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examination
Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examination

Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examination:-

What is Motion:-

यदि कोई वस्तु अन्य वस्तुओ की तुलना में समय के सापेक्ष में स्थान परिवर्तन करती है, तो वस्तु की इस अवस्था को गति ( Motion ) कहा जाता है|

सामान्य शब्दों में गति का अर्थ- वस्तु की स्थिति में परिवर्तन गति कहलाती है| जैसे- नदी में चलती हुई नाव, वायु में उड़ता वायुमान आदि|

गति (Motion):-

अदिश राशि (Scalar Quantity):- वैसी भौतिक राशि, जिनमे केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं, उसे अदिश राशि कहा जाता है; जैसे- द्रव्यमान, चाल, आयतन, कार्य, समय, ऊर्जा आदि|

नोट:- विद्युत् धारा (current), ताप (Temperature), दाब (Pressure) ये सभी अदिश राशियाँ है|

सदिश राशि (Vector Quantity):- वैसी भौतिक राशि, जिनमे परिमाण के साथ-साथ दिशा भी रहती है और जो योग के निश्चित नियमो के अनुसार जोड़ी जाती है, उन्हें सदिश राशि कहते है| जैसे- वेग, विस्थापन, बल, त्वरण आदि|

दूरी (Distance):- किसी दिए गए समयान्तराल में वस्तु द्वारा तय किये गए मार्ग की लम्बाई को दूरी कहते है| यह एक अदिश राशि है| यह सदैव धनात्मक (+ ve ) होती है|

विस्थापन (Displacement):- एक निश्चित दिशा में दो बिन्दुओ के बीच की लम्बवत (न्यूनतम) दूरी को विस्थापन कहते है| यह सदिश राशि है| इसका S.I. मात्रक मीटर है| विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य कुछ भी हो सकता है|

चाल (Speed):- किसी वस्तु द्वारा प्रति सेकण्ड तय की गई दूरी को चाल कहते है|

अर्थात् चाल = दूरी/समय यह एक अदिश राशि है| इसका S.I. मात्रक मीटर/सेकण्ड है|

वेग (Velocity):- किसी वस्तु के विस्थापन की दर को या एक निश्चित दिशा में प्रति सेकण्ड वस्तु द्वारा तय की गई दूरी को वेग कहते है| यह एक अदिश राशि है| इसका S.I. मात्रक मीटर/सेकण्ड है|

Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examation:-

त्वरण (Acceleration):- किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को ‘त्वरण’ कहते है| यह एक सदिश राशि है| इसका S.I. मात्रक m/s² है| यदि समय के साथ वस्तु का वेग घटता है तो त्वरण ऋणात्मक होता है, जिसे मंदन (retardation) कहते है|

वृत्तीय गति (Circular Motion):- जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है, तो उसकी गति को ‘वृत्तीय गति’ कहते है| यदि वह एकसमान चाल से गति करती है, तो उसकी गति को ‘एकसमान वृत्तीय गति’ कहते है|

वृत्तीय गति एक त्वरित गति होती है, क्योकि वेग की दिशा प्रत्येक बिंदु पर बदल जाती है|

कोणीय वेग (Angular Velocity):- वृत्ताकार मार्ग पर गतिशील कण को वृत्त के केंद्र से मिलाने वाली रेखा एक सेकण्ड में जितने कोण से घूम जाति है, उसे उस कण का कोणीय वेग कहते है| इसे प्रायः ω (ओमेगा) से प्रकट किया जाता है| अर्थात्  ω = θ/t यदि कण 1 सेकण्ड में न चक्कर लगाता है तो, ω = 2πn

(क्योकि 1 चक्कर में कण 2π (360 डिग्री)  रेडियन से घूम जाती है) अब यदि वृत्ताकार मार्ग की त्रिज्या r है और कण 1 सेकण्ड में न चक्कर लगाता है, तो उसके द्वारा एक सेकण्ड में चली गयी दूरी=वृत्त की परिधि x n =2πrn यही उसकी रेखीय चाल (Linear Speed) होगी|

अर्थात- v = 2 πrn: v = 2πn x r = ω x r ( ω =2πn ):रेखीय चाल = कोणीय चाल x त्रिज्या

न्यूटन का गति- नियम (Newton’s laws of motion):-

भौतिकी के पिता न्यूटन ने सन 1687 ईo में अपनी पुस्तक ‘प्रिंसिपिया’ में सबसे पहले गति के नियम को प्रतिपादन किया था|

न्यूटन का प्रथम गति-नियम (Newton’s first low of motion):-

यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में रहेगी या यदि वह एकसमान चाल से सीधी रेखा में चाल रही है, तो वैसी ही चलती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बह्हा बल लगाकर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन न किया जाये|

  • प्रथम नियम को गैलीलियो का नियम या जड़त्व का नियम भी कहते है|

बह्हा बल के आभाव में किसी वस्तु की अपनी विरामावस्था या समान गति की अवस्था को बनाये रखने की प्रवृति को जड़त्व कहते है|

प्रथम नियम से बल की परिभाषा मिलती है|

बल की परिभाषा:- बल वह बह्हा कारक है जो किसी वस्तु की प्रारंभिक अवस्था में परिवर्तन करता है या परिवर्तन करने की चेष्टा करता है| बल एक सदिश राशि है| इसका S.I. मात्रक न्यूटन है|

जड़त्व के कुछ उदाहरण :-

a.) ठहरी हुई मोटर या रेलगाड़ी के अचानक चाल पड़ने पर उसमे बैठे यात्री पीछे की ओर झुक जाते है|

b.) चलती हुई मोरारकर के अचानक रुकने पर उसमे बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते ही|

c.) कम्बल को हाथ से पकड़कर डंडे से पीटने पर धूल के कण झड़कर गिर पड़ते है|

Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examination:-

संवेग (Momentum):- किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल को उस वस्तु का संवेग कहते है| अर्थात्- संवेग = वेग x द्रव्यमान

यह एक सदिश राशि है, इसका S.I. मात्रक किग्राo x मीटर/सेकण्ड है|

न्यूटन का दिव्तीय गति-नियम (Newton’s second law of motion):-

किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होता है तथा संवेग परिवर्तन बल की दिशा में होता है| अब यदि आरोपित बल F, बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण a एवं वस्तु का द्रव्यमान m हो, तो न्यूटन के गति के दूसरे नियम से F = ma अर्थात् न्यूटन के दूसरे नियम से बल का व्यंजक प्राप्त होता है|

नोट:- प्रथम नियम दूसरे नियम का ही अंग है|

न्यूटन का तृतीय गति-नियम (Newton’s third law of motion):-

प्रत्येक क्रिया के बराबर, परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है| उदाहरण-

a.) बंदूक से गोली चलाने पर, चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगना

b.) नाव से किनारे पर कूदने पर नाव को पीछे की ओर हट जाना

c.) रॉकेट को उड़ाने में

संवेग संरक्षण का सिध्दांत :- यदि कणों के किसी समूह या निकाय पर कोई बह्हा बल नहीं लग रहा हो, तो उस निकाय का कुल संवेग नियत रहता है| अर्थात् टक्कर के पहले और बाद का संवेग बराबर होता है|

आवेग (Impulse):- जब कोई बड़ा बल किसी वस्तु पर थोड़े समय के लिए कार्य करता है, तो बल तथा समय-अन्तराल के गुणनफल को उस बल का आवेग कहते है|

आवेग =बल x समय अन्तराल = संवेग में परिवर्तन

आवेश एक सदिश राशि है, जिसका मात्रक न्यूटन सेकण्ड (Ns) है तथा इसकी दिशा वही होती है, जो बल की होती है|

Physics Motion Notes for Railway Junior Engineer and other Examination:-

अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal Force):-

जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर चलती है, तो उस पर एक बल वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है| इस बल को ही अभिकेन्द्रीय बल कहते है| इस बल के अभाव में वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर नहीं चल सकती है| यदि कोई m द्रव्यमान का पिंड v चाल से r त्रिज्या के वृत्तीय मार्ग पर चल रहा है, तो उस पर कार्यकारी वृत्त के केंद्र की ओर आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल F = m v2 / r होता है|

अपकेन्द्रीय बल (Centrifugal Force):-

अजड़त्वीय फ्रेम (Non-inertial frame) में न्यूटन के नियमो को लागू करने के लिए कुछ एसे बलों की कल्पना करनी होती ही जिन्हें परिवेश में किसी पिंड से संबंधित नहीं किया जा सकता| ये बल छदम बल या जड़त्वीय बल कहलाते है| अपकेन्द्रीय बल एक ऐसा ही जड़त्वीय बल या छदम बल है| इसकी दिशा अभिकेन्द्रीय बल के विपरीत दिशा में होती है| कपडा सुखाने की मशीन, दूध से मक्खन निकालने की मशीन आदि अपकेन्द्रीय बल के सिध्दांत पर कार्य करती है|

नोट:-

वृत्तीय पथ पर गतिमान वस्तु पर कार्य करने वाले अभिकेन्द्री बल की प्रतिक्रिया होती है| जैसे ‘मौत के कुए’ में कुए की दीवार मोटर-साईकिल पर अन्दर की ओर क्रिया बललगाती है, जबकि इसका प्रतिक्रिया बल मोटर-साइकिल द्वारा कुए की दीवार पर बाहर की ओर कार्य करता है|कभी-कभी  बाहर की ओर कार्य करने वाले इस प्रतिक्रिया बल को भ्रमवश अपकेन्द्रीय बल कह दिया जाता है, जो कि बिल्कुल गलत है|

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